इलेक्ट्रिक गिटार: कैसे बनता है, कैसे बजता है, कैसे बजाएँ
इलेक्ट्रिक गिटार में किसी भी गिटार की तरह छह तार होते हैं, लेकिन अकेले वह लगभग सुनाई ही नहीं देता। उसकी बॉडी पर लगे पिकअप थरथराते तारों को बिजली में बदलते हैं, और एम्प्लिफ़ायर उस बिजली को वह आवाज़ बनाता है जो आप सुनते हैं। क्योंकि आवाज़ पहले बिजली बनती है, उसे तेज़ किया जा सकता है, डिस्टॉर्ट किया जा सकता है, या तरह-तरह के नए रंगों में बदला जा सकता है।
इस पाठ में
इलेक्ट्रिक गिटार से मिलिए
इलेक्ट्रिक गिटार छेड़कर बजाया जाने वाला तार वाद्य है: आप पिक या उँगली से तार छेड़ते हैं और वह कंपन करता है। फ़र्क़ यह है कि कंपन बिजली के करंट में बदल जाता है, और आवाज़ एक अलग एम्प्लिफ़ायर (एम्प और लाउडस्पीकर) बनाता है। पहले इलेक्ट्रिक गिटार अकूस्टिक गिटारों की तरह ही खोखले थे। आज सबसे आम प्रकार की बॉडी ठोस होती है, क्योंकि आवाज़ पिकअप और एम्प से आती है, खोखली बॉडी की गूँज से नहीं।
सेमी-अकूस्टिक और खोखले इलेक्ट्रिक गिटार भी होते हैं। उनकी बॉडी खोखली होती है, कभी-कभी बीच में लकड़ी का एक ठोस ब्लॉक होता है जो पिकअप और ब्रिज को थामता है। इनकी आवाज़ ज़्यादा गर्म होती है, लेकिन बिना प्लग किए ये भी काफ़ी तेज़ नहीं बजते। एक और रिश्तेदार है लैप स्टील (या हवाइयन गिटार), जिसे सपाट रखकर स्लाइड से बजाया जाता है; इलेक्ट्रिक गिटार की कहानी वहीं से शुरू होती है।
वाद्यों को छाँटने की 1914 वाली मूल हॉर्नबोस्टेल–ज़ाक्स प्रणाली में कोई बिजली वाला वाद्य नहीं था; 2011 के MIMO संशोधन ने इलेक्ट्रोफ़ोन जोड़े और इलेक्ट्रिक गिटार को समूह 513, यानी इलेक्ट्रो-अकूस्टिक कॉर्डोफ़ोन में रखा। फिर भी अपने आकार के हिसाब से यह आम गिटारों के साथ समूह 321.322, यानी गर्दन वाले बॉक्स ल्यूट में ही आता है।
- परिवार
- तार वाद्य (छेड़कर बजाया जाने वाला, बिजली से एम्प्लिफ़ाई)
- वर्गीकरण
- इलेक्ट्रो-अकूस्टिक कॉर्डोफ़ोन, 513 (आकार के हिसाब से गिटार जैसा, 321.322)
- सुनाई देने वाली रेंज
- E2 से D6 (22 फ़्रेट) या E6 (24 फ़्रेट), फ़्रेट की गिनती से निकाली गई
- क्लेफ़
- ट्रेबल क्लेफ़
- ट्रांसपोज़िशन
- लिखे हुए से एक ऑक्टेव नीचे सुनाई देता है
- आम बनावट
- 6 तार, खुले तार E2–A2–D3–G3–B3–E4; आमतौर पर 21, 22 या 24 फ़्रेट
इलेक्ट्रिक गिटार के हिस्से
हेडस्टॉक से पूँछ तक, हर हिस्सा दो में से एक काम करता है: या तो वह तय करता है कि कंपन करने वाला तार कितना लंबा और कितना कसा है, या वह कंपन को बिजली में बदलता है। हर तार नट और ब्रिज के बीच खिंचा होता है, और उनके बीच की दूरी खुले तार का स्वर तय करती है। बॉडी आमतौर पर ठोस लकड़ी के एक या ज़्यादा टुकड़ों की होती है, ज़्यादातर एल्डर, ऐश, मेपल या महोगनी।
आकार मॉडल के हिसाब से बदलते हैं। Fender Player II Stratocaster की स्केल लंबाई 25.5 इंच (648 मिमी) और 22 फ़्रेट हैं; Gibson Les Paul Standard 60s की स्केल 24.75 इंच (628.65 मिमी) और 22 फ़्रेट; Ibanez RG550 में 24 फ़्रेट हैं। कुछ गिटारों, जैसे Telecaster, में गर्दन बॉडी से पेंचों से कसी होती है, जिससे लागत कम रहती है और मरम्मत आसान होती है।
गिटार के आउटपुट जैक में एक केबल लगती है जो इफ़ेक्ट पैडल या एम्प तक जाती है।

- 1हेडस्टॉक headstock
गर्दन का सिरा, जहाँ ट्यूनिंग मशीनें लगी होती हैं।
- 2ट्यूनिंग मशीनें tuning machines / tuners
घुमाने पर तार एक खूँटी पर लिपटता है; ज़्यादा कसा यानी ऊँचा स्वर। अच्छी मशीनें छोड़ने पर फिसलती नहीं, और कुछ तार को अपनी जगह लॉक कर देती हैं।
- 3नट nut
खाँचों वाली छोटी पट्टी जो तारों को थामती है, अक्सर सख़्त प्लास्टिक, हड्डी या कृत्रिम पदार्थ की। इलेक्ट्रिक वादक तार बहुत बेंड करते हैं, इसलिए इसे चिकना होना चाहिए, वरना तार अटक जाता है और बेसुरा हो जाता है।
- 4गर्दन और फ़िंगरबोर्ड neck / fingerboard (fretboard)
जहाँ आपका फ़्रेट वाला हाथ तार दबाता है। दबाने से कंपन वाला हिस्सा छोटा होता है, इसलिए स्वर ऊपर जाता है।
- 5फ़्रेट frets
फ़िंगरबोर्ड में जड़ी धातु की पट्टियाँ, जो तार दबाने पर स्वर तय करती हैं। इनकी जगहें कंप्यूटर से चलने वाले औज़ारों से बिलकुल सही काटी जाती हैं।
- 6बॉडी body
आमतौर पर ठोस लकड़ी। सॉलिड-बॉडी गिटार में आवाज़ बॉडी की गूँज पर निर्भर नहीं करती।
- 7पिकअप pickups
पतले ताँबे के तार में लिपटा एक चुंबक। जब उसके ऊपर तार कंपन करता है, तो पिकअप बिजली का सिग्नल देता है।
- 8पिकअप सिलेक्टर स्विच pickup selector switch
चुनता है कि कौन-से पिकअप सुनाई दें। Stratocaster में 5 पोज़ीशन होती हैं: एक पिकअप, या दो साथ में।
- 9वॉल्यूम और टोन कंट्रोल volume / tone controls
नॉब जो आवाज़ का ज़ोर और टोन बदलते हैं।
- 10ब्रिज bridge / tremolo (vibrato) bridge
तारों का दूसरा सिरा थामता है। ट्रेमोलो ब्रिज हिल सकता है, इसलिए एक बार (छड़) तारों का खिंचाव और स्वर बदल सकती है।
आवाज़ कहाँ से आती है
तार छेड़िए और वह आगे-पीछे झूलता है। उसका स्वर तीन बातों पर निर्भर है: लंबाई, खिंचाव और वज़न। उसे किसी फ़्रेट पर दबाइए तो वह छोटा होता है, इसलिए ऊँचा बजता है; ट्यूनर घुमाकर कसिए तो भी ऊँचा बजता है। उतनी ही लंबाई और खिंचाव में भारी तार नीचे बजता है, ठीक वैसे ही जैसे खिंचा हुआ रबर बैंड जितना ज़्यादा खींचें उतना ऊँचा बजता है।
फ़्रेट एक नियम पर चलते हैं: बची हुई तार-लंबाई का लगभग 1/18 हिस्सा काटते जाना। हर फ़्रेट स्वर को लगभग 98.9 सेंट ऊपर करता है, जो 100 सेंट वाले इक्वल-टेम्पर्ड सेमीटोन के बहुत क़रीब है; इसीलिए ऊपर जाने पर फ़्रेट पास-पास होते जाते हैं, जैसे ऐसी सीढ़ी जिसके डंडे लगातार संकरे होते जाएँ। पास-पास के तारों के बीच परफ़ेक्ट फ़ोर्थ होता है, सिवाय तीसरे तार (G3) और दूसरे तार (B3) के, जिनके बीच मेजर थर्ड है।
इलेक्ट्रिक गिटार के स्टील के तार चुंबक की ओर खिंचते हैं। पिकअप पतले तार की कुंडली में लिपटा एक चुंबक है। जब स्टील का तार चुंबक के पास कंपन करता है, तो वह कुंडली से गुज़रने वाले चुंबकीय फ़्लक्स को बदलता है, और फ़ैराडे के नियम से इससे बदलता हुआ वोल्टेज बनता है। साइकिल की डायनेमो लाइट भी इसी विचार पर चलती है: चुंबक और कुंडली को एक-दूसरे के सापेक्ष हिलाइए और बिजली मिलती है।
फिर वह बिजली का सिग्नल एम्प में जाता है। प्रीएम्प पिकअप के सिग्नल को लाइन लेवल तक बढ़ाता है, जो टोन गढ़ने और इफ़ेक्ट जोड़ने के लिए अच्छा है; पावर एम्प का मास्टर वॉल्यूम तय करता है कि स्पीकर कितना तेज़ बजे। इसे ऐसे समझिए: पहले फुसफुसाहट को साफ़ करना, फिर उसे भोंपू (मेगाफ़ोन) को सौंप देना।
तार सिर्फ़ एक टुकड़े की तरह नहीं झूलता; वह एक ही समय में दो, तीन, चार और ज़्यादा हिस्सों में भी कंपन करता है। ये उसके हार्मोनिक हैं, और हर एक में कुछ बिंदु लगभग हिलते ही नहीं, जिन्हें नोड कहते हैं। अगर पिकअप किसी हार्मोनिक के नोड के ठीक नीचे हो, तो वह हार्मोनिक दब जाता है, और छेड़ने की जगह भी इसी तरह काम करती है, इसलिए ब्रिज के पास छेड़ने पर आवाज़ ज़्यादा चमकीली और दूर छेड़ने पर ज़्यादा गर्म लगती है। यह कूदने वाली रस्सी जैसा है: खिलाड़ियों के हाथ वाले सिरे मुश्किल से हिलते हैं, जबकि बीच का हिस्सा ख़ूब झूलता है।
इसीलिए पिकअप की जगह आवाज़ बदल देती है: दो हम्बकर वाले गिटार पर ब्रिज पिकअप आमतौर पर ज़्यादा चमकीला और दमदार होता है, और नेक पिकअप ज़्यादा गर्म और मुलायम।
सिंगल-कॉइल पिकअप एक चुंबक के चारों ओर एक कुंडली है: चमकीला और साफ़, लेकिन बिजली की मेन सप्लाई से आसानी से भिनभिनाहट पकड़ लेता है (ताइवान और अमेरिका जैसी जगहों में 60 Hz)। हम्बकर उलटी दिशाओं में लिपटी दो कुंडलियाँ इस्तेमाल करता है, जिनकी चुंबकीय ध्रुवता भी उलटी होती है, इसलिए बाहरी दख़ल दोनों कुंडलियों में लगभग बराबर और उलटा आता है और कट जाता है। यह ऐसा है जैसे दो लोग दरवाज़े को उलटी तरफ़ से धकेलें: वह हिलता नहीं।
पिकअप और तरह के भी होते हैं। P-90 चौड़ी बॉबिन वाला सिंगल कॉइल है: ज़्यादा आक्रामक, ज़्यादा आउटपुट और कम भिनभिनाहट वाला। सिरेमिक चुंबक की आवाज़ चमकीली और दमदार होती है, जबकि एल्निको ज़्यादा गर्म और पुराने ज़माने जैसी (विंटेज) लगती है। ज़्यादातर पिकअप पैसिव होते हैं और उन्हें बिजली नहीं चाहिए; एक्टिव पिकअप गिटार के अंदर बैटरी से चलते हैं और ज़्यादा मज़बूत सिग्नल देते हैं, और कॉइल स्प्लिट स्विच हम्बकर की एक कुंडली बंद कर देता है ताकि वह सिंगल कॉइल जैसा काम करे।
एम्प एक हद तक ही बढ़ा सकता है। उस हद के पार धकेलिए तो लहर की चोटियाँ कट जाती हैं, और यही डिस्टॉर्शन है। ट्यूब एम्प चोटियों को धीरे-धीरे गोल करता है, जबकि सॉलिड-स्टेट एम्प उन्हें अपने सप्लाई वोल्टेज पर सपाट काट देता है, जो ज़्यादा कर्कश लगता है। डिस्टॉर्शन ढेर सारे हार्मोनिक जोड़ता है, इसलिए आवाज़ गाढ़ी हो जाती है, और एम्प का गेन नॉब तय करता है कि कितना डिस्टॉर्शन मिले: जैसे बहुत छोटे गिलास में पानी डालना, ऊपर से जो ज़्यादा है वह छलक जाता है।
क्योंकि आवाज़ बिजली है, वह एम्प से पहले इफ़ेक्ट पैडलों से गुज़र सकती है। कंप्रेसर तेज़ हिस्सों को धीमा करता है; कोरस एक हिस्से को दो वादकों जैसा बना देता है; डिले ऐसी गूँजें देता है जो अलग-अलग सुनाई दें, जबकि रिवर्ब इतनी पास-पास की प्रतियाँ इस्तेमाल करता है कि उन्हें अलग न पहचाना जा सके, जैसे बाथरूम में गाना। आम क्रम है पहले डिस्टॉर्शन, बीच में कोरस और डिले, और आख़िर में रिवर्ब, लेकिन कोई पक्का नियम नहीं है।
आज़माइए: किसी खुले डिब्बे पर एक रबर बैंड चढ़ाइए। उसे बिलकुल बीच में छेड़िए, फिर एक सिरे के पास। सिरे के पास छेड़ने पर वह ज़्यादा तीखा और चमकीला लगता है, उसी वजह से जिससे ब्रिज के पास पिक करने पर इलेक्ट्रिक गिटार ज़्यादा चमकीला लगता है।
कैसे बजाएँ
ज़्यादातर वादक पिक इस्तेमाल करते हैं। उसे अँगूठे और तर्जनी के बगल वाले हिस्से के बीच पकड़ें, तर्जनी पिक की नोक की ओर इशारा करे पर बाहर न निकले। मज़बूती से पकड़ें पर बहुत कसकर नहीं: बहुत कसकर पकड़ें तो हाथ अकड़ जाता है, बहुत ढीला तो पिक डगमगाती है या उड़ भी जाती है। स्ट्रमिंग के लिए पिक का ज़्यादा हिस्सा बाहर रखें और सटीक अकेले स्वरों के लिए कम।
बजाने से पहले ट्यून करें। स्टैंडर्ड ट्यूनिंग में छह तार नीचे से ऊपर E, A, D, G, B, E होते हैं, और शुरू में सीखे जाने वाले लगभग सारे कॉर्ड और तकनीकें इसी का इस्तेमाल करते हैं। आपका दूसरा हाथ फ़्रेट के ठीक पीछे तार दबाता है: तार छोटा होता है, और बॉडी की ओर हर फ़्रेट स्वर को एक सेमीटोन ऊपर करता है।
कुछ तकनीकें स्वरों को गाने जैसा बनाती हैं। बेंड करने के लिए आप तार को ऊपर धकेलते हैं या नीचे खींचते हैं; दोनों तरह स्वर ऊपर जाता है, क्योंकि तार ज़्यादा कस जाता है, और इलेक्ट्रिक पर बेंड करना अकूस्टिक से आसान है। वाइब्रेटो एक नन्हा बेंड है, लगभग चौथाई टोन, जो बार-बार किया जाता है, जैसे गायक के लंबे स्वर में हल्की लहर; यह स्वर को देर तक टिकाता है और भाव जोड़ता है।
हैमर-ऑन में फ़्रेट दबाने वाली उँगली छोटे हथौड़े की तरह तार को फ़्रेट पर ठोककर स्वर निकालती है; पुल-ऑफ़ में उँगली हटते समय तार को झटक देती है और नए स्वर पर पहुँचती है। दोनों सिर्फ़ फ़्रेट वाले हाथ से स्वर बदलते हैं, और अक्सर साथ इस्तेमाल होते हैं। स्लाइड करने के लिए एक स्वर बजाकर उसी तार पर उँगली दूसरे फ़्रेट तक सरकाएँ, या उँगली में धातु की स्लाइड पहनें।
छेड़ने वाला हाथ भी आवाज़ बदल सकता है। पाम म्यूटिंग के लिए हथेली का किनारा ब्रिज के पास तारों पर टिकाएँ, ताकि स्वर छोटे और कटे-कटे (स्टैकाटो) निकलें। अगर गिटार में ट्रेमोलो ब्रिज है, तो बार को दबाने या खींचने से स्वर नीचे-ऊपर होता है, और डबल-लॉकिंग ट्रेमोलो स्वर को बहुत बदलकर भी वापस ट्यून में आ सकता है।
- कुछ दबाए बिना सबसे मोटा तार छेड़ें: E2, स्टैंडर्ड ट्यूनिंग का सबसे नीचा स्वर।
- खुला छठा तार E2, फिर खुला पाँचवाँ तार A2: पास-पास के तार, परफ़ेक्ट फ़ोर्थ की दूरी पर।
- उसी पहले तार पर: खुला E4, फिर 17वाँ फ़्रेट दबाने पर A5, 17 सेमीटोन ऊपर।
रेंज और लिखा हुआ संगीत
गिटार वादक ट्रेबल क्लेफ़ पढ़ते हैं। लेकिन गिटार संगीत का एक छोटा-सा राज़ है: पन्ने पर लिखे स्वर एक ऑक्टेव नीचे सुनाई देते हैं। कुछ संगीत याद दिलाने के लिए ट्रेबल क्लेफ़ के नीचे छोटा-सा 8 लगाता है; बहुत-सा संगीत इसे छोड़ देता है, लेकिन आवाज़ फिर भी एक ऑक्टेव नीचे ही होती है।
उदाहरण के लिए, खुला छठा तार E3 लिखा जाता है, यानी मिडिल C के नीचे वाला E, जो स्टाफ़ के नीचे तीसरी लेजर लाइन के नीचे बैठता है। असल में आप सुनते हैं E2, एक सेकंड में लगभग 82.4 कंपन (A2 = 110 Hz से निकाला गया)। छह खुले तार E2, A2, D3, G3, B3 और E4 सुनाई देते हैं।
आप कितना ऊपर जा सकते हैं, यह फ़्रेट पर निर्भर है। पहला तार, E4, हर फ़्रेट पर एक सेमीटोन ऊपर जाता है, इसलिए 22 फ़्रेट D6 तक और 24 फ़्रेट E6 तक पहुँचते हैं (फ़्रेट की गिनती से निकाला गया)। हार्मोनिक और बेंड इससे भी ऊपर जा सकते हैं।
गिटार संगीत के साथ अक्सर टैबलेचर (टैब) भी होता है: छह रेखाएँ जो गिटार के छह तारों को दिखाती हैं।
सुनिए
- सीधे पिकअप से, बिना एम्प और बिना इफ़ेक्ट के। एम्प के आकार देने से पहले यही तार की कच्ची आवाज़ है।
- एक सेकंड में 110 कंपन पर ट्यून। इसकी तुलना E2 से करें: एक परफ़ेक्ट फ़ोर्थ ऊपर।
- गिटार का बीच। यहाँ से ऊपर वाले अगले तार तक फ़ोर्थ के बजाय मेजर थर्ड है।
- सबसे नीचे तार से दो ऑक्टेव ऊपर। सुनिए यह कितना पतला और चमकीला है।
- 17वें फ़्रेट पर पहला तार। तार छोटा है, इसलिए स्वर ऊँचा है और जल्दी ख़त्म होता है।
इतिहास और परिवार
1920 के दशक में लॉस एंजेलिस के स्टील गिटार वादक जॉर्ज ब्यूचैम्प ज़्यादा तेज़ आवाज़ वाला तार वाद्य चाहते थे। 1931 में एडॉल्फ़ रिकेनबैकर की मदद से उन्होंने पहला असली इलेक्ट्रिक गिटार बनाया, और उसी साल दोनों ने Ro-Pat-In नाम की कंपनी शुरू की, जिसका नाम जल्द ही Electro String हो गया। अपने आकार की वजह से इस गिटार को “फ़्राइंग पैन” (Frying Pan) उपनाम मिला।
हैरी वॉटसन ने लकड़ी का पहला नमूना कुछ घंटों में तराशा; बिक्री वाला रूप ढलवाँ एल्यूमिनियम का था। पेटेंट की अर्ज़ी 1934 में दी गई और पेटेंट 1937 में जाकर मिला, और पेटेंट दफ़्तर शुरू में तय नहीं कर पाया कि यह बिजली का उपकरण है या संगीत वाद्य।
Gibson ने 1935 में अपना पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पिकअप निकाला और 1936 में उसे ES-150 में लगाया। जैज़ गिटार वादक चार्ली क्रिश्चियन ने इसे मशहूर किया: एम्प्लिफ़िकेशन से गिटार वादक सोलो वादक के रूप में आगे आ सके।
लेस पॉल ने 1941 में एक सॉलिड-बॉडी इलेक्ट्रिक गिटार बनाया और 1945 में यह विचार Gibson के पास ले गए। 1950 में Fender ने Esquire और Broadcaster (1951 में नाम बदलकर Telecaster) पेश किए, जिन्हें आमतौर पर बड़े पैमाने पर बने पहले सॉलिड-बॉडी इलेक्ट्रिक गिटार माना जाता है। 1951 में Gretsch ने Broadcaster नाम पर आपत्ति की, और उस साल की शुरुआत में ये गिटार Nocaster कहलाए।
Gibson का पहला सॉलिड-बॉडी, Les Paul, 1952 में आया, और 1954 में Fender ने तीन पिकअप वाला Stratocaster पेश किया। भिनभिनाहट से छुटकारा पाने के लिए Gibson के सेठ लवर ने हम्बकर का आविष्कार किया, जो पहली बार फ़रवरी 1957 में ES-175 पर इस्तेमाल हुआ। 1960 के दशक में निर्माता प्रीएम्प में ट्रेमोलो, वा-वा और डिस्टॉर्शन जैसे इफ़ेक्ट जोड़ने लगे।
इलेक्ट्रिक गिटार के कई रिश्तेदार हैं। इसी समूह 513 में इलेक्ट्रिक वायलिन और Neo-Bechstein व Yamaha Electric Grand जैसे इलेक्ट्रिक पियानो हैं। 1951 में आया Fender Precision Bass व्यावसायिक रूप से सफल पहला इलेक्ट्रिक बास था।
- 1931जॉर्ज ब्यूचैम्प और एडॉल्फ़ रिकेनबैकर ने “फ़्राइंग पैन” बनाया
- 1935Gibson का पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पिकअप
- 1936Gibson ने पिकअप ES-150 में लगाया
- 1937ब्यूचैम्प का पेटेंट मंज़ूर हुआ (अर्ज़ी 1934 में)
- 1941लेस पॉल ने सॉलिड-बॉडी इलेक्ट्रिक गिटार बनाया
- 1946Gibson ने P-90 सिंगल-कॉइल पिकअप पेश किया
- 1950Fender Esquire और Broadcaster (1951 में नाम बदलकर Telecaster)
- 1951Fender Precision Bass, व्यावसायिक रूप से सफल पहला इलेक्ट्रिक बास
- 1952Gibson Les Paul, Gibson का पहला सॉलिड-बॉडी
- 1954Fender Stratocaster, तीन पिकअप के साथ
- 1957हम्बकर पहली बार Gibson ES-175 पर (पेटेंट 1959 में मिला)
- 1977Stratocaster का स्विच 3 से 5 पोज़ीशन का हुआ
शुरुआत और देखभाल
आपका पहला इलेक्ट्रिक गिटार आरामदायक और बजाने में आसान होना चाहिए; अगर ऐसा न हो, तो शायद आपका अभ्यास करने का मन ही न करे। उसे लेकर बैठिए: आपका फ़्रेट वाला हाथ फ़िंगरबोर्ड के दूर वाले सिरे तक पहुँचना चाहिए। न पहुँचे तो छोटी स्केल लंबाई चुनें, जिसमें तारों का खिंचाव भी कम होता है और दबाना आसान होता है। नए गिटार की सबसे आम दिक़्क़त बहुत ऊँचा एक्शन (तारों की ऊँचाई) है, और इसे किसी योग्य गिटार टेक्नीशियन से ठीक करवाना सबसे अच्छा है।
इलेक्ट्रिक गिटार को सच में एम्प चाहिए। शुरुआती सेट में अक्सर गिटार, ट्यूनर, स्ट्रैप, केबल, गिग बैग, पिक और एक छोटा प्रैक्टिस एम्प होता है, और कई प्रैक्टिस एम्प में चुपचाप अभ्यास के लिए हेडफ़ोन जैक होता है।
हर बार बजाने के बाद तार पोंछने से वे ज़्यादा चलते हैं, और नियमित सफ़ाई पसीने, धूल और तेल को रूप और स्पर्श ख़राब करने से रोकती है। गिटारों को लगभग 45–55% नमी और लगभग 18–24 °C पसंद है; अचानक बदलाव से लकड़ी टेढ़ी हो सकती है या फट सकती है और फ़्रेट बज़ हो सकता है। अगर गिटार कार में पड़ा रहा हो, तो एसी वाले कमरे में केस तुरंत न खोलें।
लकड़ी मौसम के साथ फूलती और सिकुड़ती है, इसलिए एक्शन को अक्सर मौसम के हिसाब से ठीक करना पड़ता है, और अलग मोटाई के तार लगाने पर आमतौर पर गर्दन के अंदर की ट्रस रॉड एडजस्ट करनी पड़ती है। अगर ये बदलाव ख़ुद करने में आप सहज नहीं हैं, तो किसी योग्य टेक्नीशियन पर छोड़ दें; Fender लगभग हर 6 महीने में जाँच की सलाह देता है। नए तारों का कोई तय समय नहीं है: जब वे घिस जाएँ, ज़ंग लग जाए, गंदे हो जाएँ, या उनकी आवाज़ चमकीली न रहे, तब बदलें।
- एम्प से भिनभिनाहट सुनाई देती है? सिंगल-कॉइल पिकअप बिजली की मेन सप्लाई का शोर आसानी से पकड़ते हैं; हम्बकर इसे काफ़ी कम कर देते हैं।
- स्वर दबाने पर भिनभिनाने वाली आवाज़ का मतलब हो सकता है कि एक्शन बहुत नीचा है, या तापमान और नमी बहुत तेज़ी से बदले।
- बेंड करने के बाद बेसुरा हो जाता है? हो सकता है नट काफ़ी चिकना न हो, इसलिए तार अटक जाता है।
- तार: आमतौर पर हल्के तार दबाने और बेंड करने में आसान होते हैं और ज़्यादा चमकीले बजते हैं, पर आसानी से टूटते हैं; भारी तार ज़्यादा आवाज़ और ज़्यादा देर टिकने वाला स्वर देते हैं।
- पिक: पतली पिक आमतौर पर स्ट्रमिंग के लिए ठीक रहती है; मोटी पिक इलेक्ट्रिक पर रिदम और लीड बजाने के लिए।
- पिक मज़बूती से पकड़ें पर बहुत कसकर नहीं: बहुत कसकर पकड़ने से हाथ अकड़ सकता है, बहुत ढीला हो तो वह हिलती है या हाथ से उड़ भी जाती है।
- अगर एक्शन बहुत ऊँचा है, या गर्दन में बहुत ज़्यादा झुकाव है, तो तार फ़िंगरबोर्ड से दूर रहते हैं और दबाने में मुश्किल होते हैं।
- Fender बताता है कि जब गिटार किसी गर्म जगह से ठंडे कमरे में आता है, तो ठंडी होते हुए लकड़ी सिकुड़ती है और स्वर साफ़ तौर पर नीचे जा सकता है: फिर से ट्यून करें।
- Electric guitar (Britannica)
- Fender Telecaster (Britannica)
- Electric Guitar Pickups (HyperPhysics)
- Guitar (HyperPhysics)
- Electric Guitar Effects (HyperPhysics)
- Classification of instruments (MIMO / Hornbostel–Sachs)
- Electric guitar construction (Yamaha)
- A Guide to Electric Guitar Pickups (Yamaha Hub)
- Rickenbacker legacy
- The history of Gibson electric guitar pickups
- How to Solo on Guitar (Fender)
- Guitar care dos and don'ts (Fender)
- Reading clefs (Open Music Theory)
- Tone and Sound on Your Guitar, Part 2 (Yamaha Hub)
- Get a Grip: How to Hold a Pick (Fender)
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- Gibson Les Paul Models: Everything You Need to Know (Gibson)
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- Yamaha Hub: How to choose your first guitar
- Fender Support: How often should I have a set-up adjustment done?
- Fender Support: How often should I change my strings?
- Fender: Electric Guitar String Buyer's Guide
- Fender: A Guitar Amp Buying Guide for Beginners
पियानो की आवाज़: Salamander Grand Piano, Alexander Holm द्वारा (CC BY 3.0)।